
विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे व पालकमंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील ने दी श्रद्धांजलि
अहिल्यानगर, दिनांक 17 :
राहुरी के विधायक स्व. शिवाजीराव भानुदास कर्डिले का आज उनके बुऱ्हाणनगर स्थित निवास स्थान के प्रांगण में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस अवसर पर जिले तथा राज्य के कई दिग्गज नेता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे और राज्य के जलसंपदा मंत्री व जिल्हे के पालकमंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटील ने पार्थिव पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पुलिस टुकड़ी ने हवाई फायर कर उन्हें सलामी दी। उनके पार्थिव को पुत्र अक्षय ने मुखाग्नि दी।
सभापति प्रो. शिंदे ने कहा, “वे हमेशा गरीब, दलित, शोषित और किसानों के साथ खड़े रहे। उनके आकस्मिक निधन से पूरा जिला शोकमग्न है।”
पालकमंत्री डॉ. विखे पाटील ने कहा, “वे जनता से जुड़े हुए, जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले नेता थे। समाजकारण और राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय है।”
नेताओं की मौजूदगी
अंतिम दर्शन के लिए पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे, विधायक संग्राम जगताप, काशीनाथ दाते, विट्ठल लंघे, अमोल खताळ, मोनिका राजळे, विक्रमसिंह पाचपुते, सुरेश धस, शरद सोनवणे, राहुल कुल, पूर्व सांसद डॉ. सुजय विखे पाटील, पूर्व मंत्री बाळासाहेब थोरात, पूर्व मंत्री अण्णासाहेब म्हस्के पाटील सहित अनेक मान्यवर उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद भंडारी, पुलिस अधीक्षक सोमनाथ घार्गे, उपविभागीय अधिकारी सुधीर पाटील और तहसीलदार संजय शिंदे ने श्रद्धांजलि दी।
सार्वजनिक जीवन की झलक
शिवाजीराव कर्डिले ने सार्वजनिक जीवन में चार दशकों से अधिक समय सक्रिय भूमिका निभाई। वे छह बार महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य रहे। वर्ष 2002 से 2004 तक उन्होंने मत्स्य व्यवसाय व बंदरगाह विभाग के राज्य मंत्री तथा 2004 में जलसंधारण, वन, महिला व बाल विकास, भूकंप पुनर्वसन विभाग के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। उसी वर्ष वे अहमदनगर जिले के पालकमंत्री भी रहे।
सहकारिता क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे अहमदनगर जिला सहकारी बैंक के संचालक, उपाध्यक्ष और चेयरमैन के रूप में लंबे समय तक कार्यरत रहे। उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1984 में ग्रामपंचायत बु-हाणनगर के सरपंच पद से हुई थी।
उनके निधन से अहमदनगर जिले सहित राज्य की राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपूरणीय क्षति हुई है।








